अपने सपने के लिए उसने 7 साल कड़ी मेहनत की, कई बलिदान दिए… और आज उसने पायलट….

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कहते हैं, ‘जहां चाह, वहां राह…’ और मुंबई की अंकिता की कहानी पूरी तरह से इस कहावत को साबित करती है. अंकिता की इस प्रेरणादायक कहानी को फ़ेसबुक पेज Humans of Bombay ने शेयर किया है. मुंबई में रहने वाली अंकिता की इस कहानी में संघर्ष है, लोगों की रूढ़िवादी सोच है, आर्थिक समस्याएं हैं, कई असफलताएं है, पर इन सबके इतर कुछ कर दिखाने का जुनून है.

Humans of Bombay  की पोस्ट के अनुसार,

‘अंकिता ने बताया कि मैं पायलट बनना चाहती थी. और जब मैंने अपने इस सपने के बारे में अपने पेरेंट्स को बताया, कि मैं US Cost से कोर्स करना चाहती हूं और इस कोर्स की फ़ीस 25 लाख रुपये है. इस बात को सुनकर मेरे पापा ने तुरंत ही मना कर दिया, लेकिन मेरी मां ने मेरा साथ दिया और मां के कई बार कहने पर पापा ने इसमें एडमिशन दिलाने के लिए 25 लाख रुपये का लोन लिया और इसके साथ ही मुझको आशीर्वाद दिया.’

हालांकि, ट्रेनिंग ख़त्म होने के बाद, अंकिता को जॉब मिलने में बहुत दिक्कतें आयीं, उसको कहीं भी पायलट की नौकरी नहीं मिली. दो साल तक, उसने अलग-अलग पोज़िशन्स के लिए अप्लाई किया, मगर उसको सफ़लता नहीं मिली. इस बीच उसे नाते-रिश्तेदारों के तानों को भी झेलना पड़ा. कोई कहता कि मेरे पेरेंट्स ने एक लड़की की पढ़ाई पर इतना पैसा खर्च किया, तो कोई कहता कि आपको अपनी लड़की को डॉक्टर बनाना चाहिए था… एक वक़्त ऐसा भी आया जब मुझे लगने लगा कि शायद ये सभी लोग सही बोल रहे हैं.’

मगर तानों और उपेक्षाओं के बीच अंकिता ने हिम्मत नहीं हारी, और उसने एयर होस्टेस की जॉब के लिए अप्लाई कर दिया. चार बार रिजेक्ट होने के बाद आखिरकार उसको एयर होस्टेस की जॉब मिल गई.

अंकिता कहती हैं कि,

‘मैं खुद को हमेशा से एक पायलट की यूनिफ़ॉर्म में देखना चाहती थी और यही मेरा सपना था – मुझे पता था कि एयर होस्टेस बनना मेरे सपने का अंत नहीं था.’

इसलिए उसने एक पायलट बनने के लिए 5 एग्ज़ाम दिए और उनको पास भी किया. अंकिता ने बताया कि वो लंच ब्रेक, वाशरूम में, ट्रेन और बस के सफ़र, यहां तक कि उनको जब भी खाली समय मिलता था, वो अपनी पढ़ाई ही करती थी. इसके साथ-साथ वो फ़ुल-डे जॉब भी कर रही थी.

अंकिता की कई सालों की कड़ी मेहनत और कई असफ़लताओं के बाद वो दिन भी आया, जब उसने पूरे इंडिया में टॉप किया और पायलट ट्रेनिंग के लिए उसको स्कॉलरशिप मिली.

‘आखिरकार, 7 सालों के कठिन परिश्रम के बाद, मैंने एक पायलट की यूनिफ़ॉर्म पहनी. मेरी पहली फ़्लाइट बरोडा के लिए थी. ये मेरे लिए बहुत ख़ुशी का पल था, जब लोग गर्व के साथ मुझे एक पायलट के रूप में देख रहे थे. इतना ही नहीं एक छोटी बच्ची ने मेरा ऑटोग्राफ़ भी लिया, क्योंकि उसने सोचा कि मैं उस प्लेन की कैप्टन हूं.’

अंकिता की पूरी कहानी आप यहां पढ़ सकते हैं:

 

अपने ख़िलाफ़ खड़ी होने वाली हर बाधा को पार करते हुए अंकिता को सफ़लता मिली, और अंकिता की ये कहानी हर महिला, पुरुष सबको प्रेरित करने वाली है. अंकिता की सफ़लता की इस कहानी को अभी तक 4,500 बार शेयर किया जा चुका है और हज़ारों लोगों ने उसकी तारीफ़ वाले कमेंट्स भी किये हैं.

इतना ही नहीं एक यूज़र ने तो अंकिता के ऑटोग्राफ़ भी मांगे हैं और लिखा है कि मुझे तुम पर गर्व है, सफ़लता की क्या कहानी है.’

 वहीं एक यूज़र ने लिखा, ‘मैं तुमको नहीं जानती अंकिता, लेकिन सलाम है तुमको, तुमने कभी हिम्मत नहीं हारी, मैं आशा करती हूं कि लाखों-करोड़ों लोग तुम्हारी इस कहानी से प्रेरणा लेंगे.

Humans of Bombay ने अंकिता की एक फ़ोटो भी शेयर की है

और पूछा कि कैसे वो इस मंज़िल तक पहुंची, जिसका जवाब अंकिता ने बड़ी सहजता से दिया, 

‘जब मेरे चारों और सबकुछ ग़लत हो रहा था, मैंने खुद से कहा – मैं सरक्षित तरीके से धीरे-धीरे अपनी मंज़िल तक पहुंचूंगी, मुझे बस ये सोचना है कि मैं इसे कैसे करूंगी – और मैंने ये कर दिखाया!’ यह पोस्ट स्कूप्व्हूप हिंदी से ली गये है | via –  ScoopWhoop हिंदी 

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